Navratro में साबूदाना खाने से टूट सकता है आपका व्रत, साबूदाने में मांस मिला हुआ है


आप ये सब सुनके बहुत खुश हुए होंगे कि साबूदाना Sago Palm नामक पौधे के तने से निकले गूदे से बनता है। आपको भी यही लग रहा होगा कि यह तो बिलकुल शाकाहारी है, दरअसल जब जड़ और तने से गूदा निकाला कर साबूदाना बनाने की प्रक्रिया शुरू करते दौरान अनजाने में इसमें मांस के कुछ तत्वो का मिश्रण हो जाता है।

सबसे ज्यादा साबूदाना Tamilnadu में बनाया जाता है और Sago Palm का गूदा Singapore, Malaysia, Japan, Netherland से import किया जाता है। जिसके बाद Tamilnadu के सलेम जिले में बनाया जाता है। ऐसी कई और जगह है जहा साबूदाना बनाया जाता है।

आपको बताते है, साबूदाने में मांस कैसे मिल जाता है। गूदे को बड़े-बड़े टैंकों में कई दिनों तक सड़ाया जाता है। जिन टैंक में गूदे को सड़ाया जाता है, वह खुले मैदान मे होते हैं। इसके अलावा टैंक को खुला ही रखा जाता है। आसपास की लाइट्स के कारण रोजाना तमाम कीट-पतंगे टैंक में गिरते हैं और गूदे में फंसकर दम तोड़ देते हैं। इसके अलावा सडऩ के कारण गूदे में लाखों सूक्ष्म कीट भी पैदा हो चुके होते हैं।

करीब 50-55 दिन तक सागो पाम का गूदा सडऩे के बाद मजदूरों के जरिए बाहर निकालकर हौद में एकत्र किया जाता है, जहां मजदूर इन्हें पैरों से रौंदते हैं। अक्सर देखा गया है कि गूदे को आटे की तरह सानने से पहले कीड़ों-मकोड़ों को अलग नहीं किया जाता है। करीब दो घंटे तक पैरों से रौंदककर गूदे को आटा जैसा बना लिया जाता है। अब इसे मशीनों की सहायता से साबूदाने यानी छोटे-छोटे दानों का आकार दिया जाता है। अंत में सूखने के बाद पॉलिश होती है। इस तरह व्रत और उपवास में फलाहार के रूप में इस्तेमाल होने वाला साबूदाना लाखों कीट-पतंगों के कारण मांसाहारी बन चुका होता है, लेकिन अनजान लोग धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं।


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